“यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत को इस सदी की आर्थिक ताकत बताते हुए कहा कि सफल भारत दुनिया की स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा के लिए आवश्यक है। यह बयान भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते की अंतिम वार्ता के बीच आया, जो दो अरब लोगों के बाजार को जोड़ेगा। समझौते से भारत का ईयू के साथ व्यापार अधिशेष 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि वैश्विक तनावों में ईयू-अमेरिका व्यापार रुका हुआ है।”
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत को इस सदी की प्रमुख आर्थिक ताकत करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक सफल भारत न केवल अपनी सीमाओं तक सीमित है, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अंतिम चरण में है, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ कहा जा रहा है। इस समझौते से दोनों पक्षों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी, लेकिन कुछ वैश्विक नेता इससे असहज महसूस कर सकते हैं।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन का नाम सुनते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जैसे नेताओं में चिढ़ पैदा हो सकती है। ट्रंप ने हाल ही में ईयू पर टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जबकि मुनीर और शरीफ भारत-ईयू संबंधों को पाकिस्तान के लिए चुनौती मानते हैं, खासकर हाल के भारत-पाकिस्तान तनावों के बाद जहां ईयू ने भारत के पक्ष में बयान दिए हैं। उर्सुला की यह टिप्पणी इन नेताओं के लिए एक याद दिलाती है कि भारत की आर्थिक उन्नति वैश्विक समीकरण बदल रही है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने क्या कहा?
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत को ‘इस सदी की आर्थिक पावरहाउस’ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की सफलता से दुनिया अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनती है, और इससे सभी को फायदा होता है। यह बयान भारत-ईयू संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला है, जहां ईयू भारत को एक प्रमुख साझेदार के रूप में देख रहा है। उर्सुला ने Davos में विश्व आर्थिक मंच पर भी इस समझौते को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया, जिसमें लगभग दो अरब लोगों का संयुक्त बाजार बनेगा, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा।
यह टिप्पणी भारत की आर्थिक ताकत पर केंद्रित है, जहां भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उर्सुला ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन को सराहा, जो ईयू के लिए अवसर पैदा कर रहे हैं। हालांकि, यह बयान वैश्विक भू-राजनीति में बदलाव का संकेत देता है, जहां ईयू भारत के साथ गठबंधन को अमेरिका और पाकिस्तान जैसे देशों के प्रभाव से अलग रखना चाहता है।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: मुख्य बिंदु
भारत और ईयू के बीच यह समझौता 2007 में शुरू हुआ था, लेकिन 2013 में रुक गया। 2022 में इसे फिर शुरू किया गया, और अब यह अंतिम दौर में है। समझौते से भारत को ईयू बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि ईयू कंपनियां भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था से लाभ उठाएंगी। यहां कुछ प्रमुख बिंदु हैं:
संयुक्त बाजार का आकार : लगभग 2 अरब उपभोक्ता, वैश्विक जीडीपी का 25% हिस्सा।
टैरिफ में कटौती : भारत ईयू कारों पर टैरिफ 110% से घटाकर 40% कर सकता है, और बाद में 10% तक।
उद्योगों पर प्रभाव : ऑटोमोटिव सेक्टर में Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसी कंपनियां लाभान्वित होंगी।
व्यापार वृद्धि : वर्तमान में 135 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार, जो 2031 तक दोगुना हो सकता है।
यह समझौता भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देगा, जहां ईयू निवेश से रोजगार और तकनीकी ट्रांसफर बढ़ेगा। ईयू के लिए, यह चीन+1 रणनीति का हिस्सा है, जहां भारत वैकल्पिक सप्लाई चेन के रूप में उभर रहा है।
| वर्ष | भारत-ईयूव्यापार(अरबडॉलरमें) | भारतकाअधिशेष(अरबडॉलरमें) | ईयूकाभारतमेंनिर्यातहिस्सा(%) |
|---|---|---|---|
| 2023-24 | 135 | 20 | 0.8 |
| 2025(अनुमान) | 160 | 30 | 1.2 |
| 2031(अनुमान) | 250 | 51 | 2.5 |
यह टेबल दर्शाती है कि समझौते से भारत का व्यापार अधिशेष बढ़ेगा, जो ईयू के साथ निर्यात हिस्से को 17.3% से 22-23% तक ले जाएगा।
वैश्विक तनावों में समझौते का महत्व
यह समझौता ऐसे समय आ रहा है जब वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल है। ईयू ने अमेरिका के साथ अपना व्यापार समझौता निलंबित कर दिया है, मुख्यतः ट्रंप की Greenland पर टिप्पणियों और उसके बाद लगाए गए 10% टैरिफ के कारण। ट्रंप ने आठ ईयू देशों पर यह टैरिफ लगाया, जो फरवरी से लागू होगा। इससे ईयू भारत की ओर अधिक झुक रहा है, जो ट्रंप के लिए असुविधाजनक है क्योंकि अमेरिका भारत के साथ अलग व्यापार सौदे चाहता है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान में जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भारत-ईयू निकटता से चिंतित हैं। हाल के भारत-पाकिस्तान संघर्षों में ईयू ने भारत के पक्ष में बयान दिए, जैसे Pahalgam हमले की निंदा। पाकिस्तान ईयू से GSP+ स्टेटस पर निर्भर है, लेकिन मानवाधिकार मुद्दों पर ईयू की आलोचना से तनाव बढ़ा है। उर्सुला का भारत प्रशंसा बयान पाकिस्तानी नेतृत्व के लिए एक चुनौती है, क्योंकि यह दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।