दुनियाभर में भारतीय चावल का डंका! प्रतिबंध हटते ही निर्यात में 19% का जबरदस्त उछाल, तोड़े रिकॉर्ड

“भारत के चावल निर्यात ने 2025 में 19.4% की तेज वृद्धि दर्ज की, कुल 21.55 मिलियन टन पहुंचकर दूसरा सबसे ऊंचा स्तर छुआ। प्रतिबंध हटने से गैर-बासमती चावल का निर्यात दोगुना हुआ, एशियाई बाजार में कीमतें 10-15% घटीं और वैश्विक आपूर्ति मजबूत बनी।”

भारत ने 2025 में चावल निर्यात में 19.4% की वृद्धि हासिल की, जो कुल 21.55 मिलियन टन पहुंच गई। यह आंकड़ा अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है, जिसमें गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात सबसे ज्यादा योगदान दे रहा है। सरकार द्वारा सभी निर्यात प्रतिबंध हटाने के बाद, अफ्रीकी और एशियाई बाजारों में भारतीय चावल की मांग बढ़ी, जिससे वैश्विक कीमतों पर दबाव पड़ा।

गैर-बासमती चावल का निर्यात 2025 में 10.5 मिलियन टन तक पहुंचा, जो पिछले साल के मुकाबले 25% अधिक है। बासमती चावल ने भी 5 मिलियन टन का आंकड़ा पार किया, मुख्य रूप से मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों को सप्लाई से। प्रतिबंधों के दौरान निर्यातकों को लगभग 5,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन अब रिकवरी तेज हो गई है।

एशियाई चावल बाजार में भारतीय निर्यात की वजह से 5% इंडिका चावल की कीमतें 400 डॉलर प्रति टन से नीचे आ गईं, जो थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए चुनौती बनी। वैश्विक स्तर पर, यह वृद्धि अफ्रीकी देशों जैसे घाना और सेनेगल की खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर रही है, जहां भारतीय चावल 70% आयात का हिस्सा बन चुका है।

प्रमुख आंकड़े:

वर्षकुल चावल निर्यात (मिलियन टन)वृद्धि दर (%)प्रमुख बाजार
202315.2-10अफ्रीका, एशिया
202418.119मध्य पूर्व, यूरोप
202521.5519.4अफ्रीका, मध्य पूर्व

निर्यात में यह उछाल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, क्योंकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 5% की बढ़ोतरी से घरेलू उत्पादन 120 मिलियन टन तक पहुंचा। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में चावल की पैदावार बढ़ी, जिससे स्टॉक स्तर 40 मिलियन टन के ऊपर बने रहे।

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प्रभाव और रुझान:

वैश्विक आपूर्ति में भारत का हिस्सा अब 45% हो गया, जो थाईलैंड (25%) से काफी आगे है।

कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं को राहत, लेकिन प्रतिद्वंद्वी देशों के किसानों पर दबाव बढ़ा।

2026 में निर्यात 22 मिलियन टन पार करने की उम्मीद, यदि मौसम अनुकूल रहा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगा।

यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, जिसमें कृषि निर्यात कुल GDP के 2% योगदान दे रहा है।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट है, विभिन्न स्रोतों पर आधारित।

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