किसानों से जुड़ी बड़ी खबर, यूरिया खरीदने के लिए अनिवार्य होगी फार्मर आईडी; कैसे बनवाएं? स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस.

“केंद्र सरकार यूरिया की बिक्री को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल फार्मर आईडी को अनिवार्य करने की योजना बना रही है, जिससे केवल वास्तविक किसानों को ही सब्सिडी वाला उर्वरक मिल सके। यह कदम सब्सिडी व्यय को नियंत्रित करने और कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, जहां FY26 में सब्सिडी 1.91 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। फार्मर आईडी AgriStack के तहत जारी की जाती है, जो आधार पर आधारित है, और 2026-27 तक 11 करोड़ आईडी जारी करने का लक्ष्य है। पंजीकरण राज्य-विशेष पोर्टल या PM Kisan के माध्यम से होता है, जिसमें आधार सत्यापन, भूमि विवरण और बैंक डिटेल्स आवश्यक हैं।”

केंद्र सरकार ने यूरिया की बिक्री को रेशनलाइज करने के लिए डिजिटल फार्मर आईडी को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य करने की योजना बनाई है। यह नीति उर्वरक सब्सिडी को नियंत्रित करने का प्रयास है, जहां अप्रैल से दिसंबर 2025 तक यूरिया की खपत 31.15 मिलियन टन पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 4 प्रतिशत अधिक है। फार्मर आईडी से सुनिश्चित होगा कि उर्वरक केवल भूमि मालिक, खेती करने वाले या अधिकृत व्यक्ति को ही बेचा जाए, जिससे सब्सिडी का दुरुपयोग रोका जा सके। AgriStack प्लेटफॉर्म पर यह एकीकरण पायलट चरण में शुरू होगा, जो किसानों की शिकायतों जैसे यूरिया की कमी को दूर करने के लिए मार्च 2026 तक कई हस्तक्षेपों का हिस्सा है।

फार्मर आईडी एक यूनिक डिजिटल पहचान है, जो आधार पर आधारित 10-अंकीय संख्या के साथ चेकसम डिजिट से बनी होती है। यह किसान के नाम, भूमि विवरण और अन्य प्रमुख डिटेल्स को शामिल करती है। AgriStack के तहत, यह आईडी किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ती है, जिसमें उर्वरक खरीद, PM Kisan भुगतान और फसल बीमा शामिल हैं। 2026 में, इस आईडी के बिना यूरिया खरीद मुश्किल हो सकती है, क्योंकि सरकार सब्सिडी को 1.68 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से ऊपर न जाने देने के लिए सख्त कदम उठा रही है। वर्तमान में, यूरिया की सब्सिडी व्यय FY26 में 1.91 लाख करोड़ रुपये पार करने का अनुमान है, जो वैश्विक कीमतों में वृद्धि और बढ़ती मांग से प्रेरित है।

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इस नीति के लाभों में कालाबाजारी की रोकथाम प्रमुख है, जहां गैर-किसान तत्व सब्सिडी वाले यूरिया को ऊंचे दामों पर बेचते हैं। किसानों के लिए, फार्मर आईडी से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण सुनिश्चित होता है, जैसे PM Kisan की 22वीं किस्त के लिए अनिवार्य e-KYC और आईडी, जहां 2,000 रुपये की राशि केवल वैध आईडी वाले खातों में जाती है। AgriStack से जुड़कर, किसान डिजिटाइज्ड लैंड रिकॉर्ड्स प्राप्त कर सकते हैं, जिसमें भूमि की लोकेशन, सीमाएं और फसल डेटा शामिल होता है। इससे ऋण प्राप्ति आसान होती है, क्योंकि बैंक फार्मर आईडी को सत्यापित पहचान के रूप में स्वीकार करते हैं।

चुनौतियां भी मौजूद हैं, जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी, जहां कई किसान ऑनलाइन पंजीकरण से अनजान हैं। कुछ राज्यों में, जैसे तेलंगाना, यूरिया बुकिंग ऐप पहले से आधार और पट्टादार पासबुक पर आधारित है, जहां OTP सत्यापन से लेनदेन वैध होता है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर, AgriStack का लक्ष्य 2026-27 तक 11 करोड़ फार्मर आईडी जारी करना है, जो प्लॉट-वाइज फसल डेटा संग्रह से जुड़ा है। यदि आईडी नहीं बनी, तो यूरिया खरीद में देरी या अस्वीकृति हो सकती है, जिससे खेती प्रभावित होगी।

फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया राज्य-विशेष है, लेकिन मुख्य रूप से AgriStack या PM Kisan पोर्टल के माध्यम से होती है। योग्यता में भारतीय नागरिक होना, कृषि भूमि का मालिक या खेती करने वाला होना शामिल है। आवश्यक दस्तावेज: आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि रिकॉर्ड (जैसे खाता-खसरा), मोबाइल नंबर और फोटो। पंजीकरण निःशुल्क है और CSC केंद्रों या ऑनलाइन किया जा सकता है।

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फार्मर आईडी बनाने का स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस

स्टेपविवरणआवश्यक कार्रवाई
1आधिकारिक वेबसाइट पर जाएंAgriStack.gov.in या राज्य पोर्टल (जैसे UP के लिए upfr.agristack.gov.in) खोलें। PM Kisan के लिए pmkisan.gov.in पर “New Farmer Registration” चुनें।
2आधार सत्यापनआधार नंबर दर्ज करें और OTP प्राप्त करें। मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए।
3लॉगिन अकाउंट बनाएंयूजर आईडी और पासवर्ड सेट करें। ईमेल या मोबाइल वैरिफाई करें।
4पोर्टल में लॉगिन करेंबनाए गए क्रेडेंशियल्स से प्रवेश करें।
5किसान के रूप में पंजीकरण करेंफॉर्म भरें: नाम, पता, भूमि विवरण (एरिया, प्रकार), बैंक डिटेल्स (IFSC, अकाउंट नंबर)। दस्तावेज अपलोड करें।
6आवेदन सबमिट करेंविवरण चेक करें और सबमिट करें। एक यूनिक रेफरेंस नंबर मिलेगा।
7सत्यापन और अप्रूवलविभाग द्वारा भूमि रिकॉर्ड्स चेक किए जाते हैं। अप्रूवल पर फार्मर आईडी ईमेल/SMS से प्राप्त होती है।
8आईडी डाउनलोड करेंपोर्टल से लॉगिन कर डिजिटल आईडी डाउनलोड करें। प्रिंटआउट रखें।

यदि ऑफलाइन मोड चुनें, तो निकटतम CSC केंद्र पर जाएं, जहां ऑपरेटर दस्तावेज स्कैन कर पंजीकरण पूरा करता है। प्रक्रिया में 7-15 दिन लग सकते हैं, लेकिन तत्काल सत्यापन से आईडी तुरंत जारी हो सकती है। AgriStack से जुड़ने पर, किसान फसल सर्वे डेटा अपडेट कर सकते हैं, जो यूरिया आवंटन में मदद करता है।

राज्य-विशेष विविधताएं: उत्तर प्रदेश में UPFR पोर्टल पर अतिरिक्त भूमि मैपिंग आवश्यक है। तेलंगाना में यूरिया ऐप से आईडी लिंक होती है, जहां पट्टादार पासबुक अनिवार्य है। महाराष्ट्र या अन्य राज्यों में स्थानीय कृषि विभाग ऐप्स का उपयोग करें। यदि आईडी पहले से PM Kisan में है, तो इसे AgriStack से लिंक करें, जो स्वचालित रूप से उर्वरक खरीद के लिए वैध हो जाती है।

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इस नीति से किसानों को यूरिया की उपलब्धता बढ़ेगी, क्योंकि आवंटन डेटा-ड्रिवन होगा। उदाहरण के लिए, प्लॉट-वाइज फसल डेटा से यूरिया की जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है, जो कमी की शिकायतों को 2026 में कम करेगा। सरकार का फोकस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, जहां फार्मर आईडी से जुड़े ऐप्स से रीयल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी।

प्रमुख बिंदु: फार्मर आईडी के लाभ और उपयोग

सब्सिडी एक्सेस : यूरिया पर 75% तक सब्सिडी केवल आईडी से मिलेगी।

ऋण सुविधा : बैंक KCC के लिए आईडी को प्रूफ मानते हैं।

योजना एकीकरण : PM Kisan, फसल बीमा और मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड से लिंक।

डेटा सुरक्षा : आधार-आधारित, लेकिन गोपनीयता नियमों के तहत सुरक्षित।

अपडेटेशन : आईडी में भूमि परिवर्तन सालाना अपडेट करें।

किसानों को सलाह है कि जल्द पंजीकरण कराएं, क्योंकि 2026 में नीति लागू होने पर देरी से खेती चक्र प्रभावित हो सकता है। AgriStack का विस्तार 11 करोड़ आईडी तक पहुंचाने से कृषि सेक्टर डिजिटल हो जाएगा, जो उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगा।

Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है, स्रोतों का उल्लेख नहीं किया गया है।

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