Budget Expectations 2026: टैक्सपेयर्स को स्टैंडर्ड डिडक्शन में बड़ी राहत की उम्मीद, ₹1 लाख तक बढ़ सकती है कटौती

“बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख तक करने की उम्मीद है, जो मिडल क्लास टैक्सपेयर्स को महंगाई से राहत देगी। नई टैक्स रिजीम में 80D डिडक्शन की वापसी और 30% स्लैब को ₹30 लाख तक बढ़ाने पर फोकस। टैक्स-फ्री इनकम ₹17 लाख तक पहुंच सकती है, जिससे कंजम्प्शन बढ़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव सैलरीड क्लास को डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाने में मदद करेंगे।”

बजट 2026 में सैलरीड टैक्सपेयर्स की सबसे बड़ी उम्मीद स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी है। वर्तमान में नई टैक्स रिजीम में यह ₹75,000 है, जबकि पुरानी रिजीम में ₹50,000। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के असर को कम करने के लिए इसे ₹1 लाख तक बढ़ाया जा सकता है, जो सीधे टैक्सेबल इनकम को घटाएगा और हाथ में आने वाली सैलरी को बढ़ाएगा। इससे करीब 4 करोड़ सैलरीड कर्मचारियों को फायदा होगा, खासकर उन लोगों को जो मेट्रो सिटीज में रहते हैं जहां लिविंग कॉस्ट हाई है।

नई टैक्स रिजीम में बदलाव की मांग तेज हो रही है, क्योंकि 72% टैक्सपेयर्स अब इसी को चुन रहे हैं। अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹1 लाख हो जाता है, तो टैक्स-फ्री इनकम लिमिट ₹12.75 लाख से बढ़कर ₹13.75 लाख तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, 80D डिडक्शन की वापसी की उम्मीद है, जो हेल्थ इंश्योरेंस पर ₹25,000 तक की छूट देगी। यह बदलाव मिडल क्लास फैमिलीज को मेडिकल खर्चों से राहत प्रदान करेगा, खासकर पोस्ट-पैंडेमिक दौर में जहां हेल्थकेयर कॉस्ट 15-20% सालाना बढ़ रही है।

30% टैक्स स्लैब को ₹15 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख तक करने की चर्चा है। इससे हाई-इनकम ग्रुप में भी राहत आएगी, लेकिन मिडल क्लास पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, ₹20 लाख सालाना कमाने वाला व्यक्ति मौजूदा रिजीम में ₹2.5 लाख टैक्स देता है, लेकिन नए स्लैब में यह घटकर ₹1.5 लाख रह सकता है। यह बदलाव इंफ्लेशन को ऑफसेट करेगा, जो FY 2025-26 में 5-6% के आसपास रहने की उम्मीद है।

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होम लोन पर इंटरेस्ट डिडक्शन को ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने की मांग है। इससे अफोर्डेबल हाउसिंग को बूस्ट मिलेगा, खासकर युवा प्रोफेशनल्स के लिए जो EMI में फंसे हैं। NPS में एंप्लॉयर कंट्रीब्यूशन डिडक्शन की रिस्टोरेशन भी संभावित है, जो रिटायरमेंट सेविंग्स को बढ़ावा देगी। गैर-सैलरीड इंडिविजुअल्स के लिए NPS में पैरिटी लाने से फ्रीलांसर्स और बिजनेस ओनर्स को फायदा होगा।

कंजम्प्शन बूस्ट के लिए ये बदलाव महत्वपूर्ण हैं। अर्थव्यवस्था को $5 ट्रिलियन टारगेट तक पहुंचाने में मिडल क्लास की भूमिका बड़ी है, और बढ़ी हुई डिस्पोजेबल इनकम से रिटेल, ऑटो और FMCG सेक्टर्स में ग्रोथ आएगी। पिछले साल के बजट में टैक्स रिलीफ से कंजम्प्शन में 8% बढ़ोतरी देखी गई थी, और इस साल यह 10-12% तक जा सकती है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन में संभावित बदलावों की तुलना

पैरामीटरवर्तमान (नई रिजीम)अपेक्षित (बजट 2026)फायदा (₹10 लाख इनकम वाले के लिए)
स्टैंडर्ड डिडक्शन₹75,000₹1,00,000टैक्स सेविंग ₹7,500 (30% स्लैब में)
टैक्स-फ्री थ्रेशोल्ड₹12.75 लाख₹13.75 लाखसालाना सेविंग ₹15,000 तक
इंफ्लेशन एडजस्टमेंट5% वार्षिक7-8% एक्सपेक्टेडमिडल क्लास को 10% ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम

यह टेबल दर्शाती है कि छोटे बदलाव भी बड़ा असर डाल सकते हैं। ₹15 लाख इनकम वाले व्यक्ति के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने से सालाना ₹7,500 की बचत होगी, जो डायरेक्टली कंजम्प्शन में जाएगी।

नई टैक्स रिजीम में प्रमुख अपेक्षित सुधार

टैक्स स्लैब्स का विस्तार : 5% स्लैब को ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख तक, और 10% को ₹12 लाख तक। इससे लोअर मिडल क्लास को राहत मिलेगी।

हेल्थ डिडक्शन : 80D को शामिल कर ₹25,000 तक छूट, सीनियर सिटिजंस के लिए ₹50,000।

होम लोन रिलीफ : पार्शियल डिडक्शन, जहां इंटरेस्ट पर ₹3 लाख तक छूट संभावित।

NPS इक्विटी : नॉन-सैलरीड के लिए 14% डिडक्शन, जो रिटायरमेंट प्लानिंग को मजबूत करेगा।

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सर्चार्ज थ्रेशोल्ड : ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख, हाई-इनकम लेकिन मिडल क्लास लाइफस्टाइल वालों के लिए फायदेमंद।

ये सुधार टैक्स कंप्लायंस को आसान बनाएंगे और डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन को तेज करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी रिजीम को फेज आउट करने की दिशा में ये कदम हैं, लेकिन ट्रांजिशन को स्मूथ रखा जाएगा।

मिडल क्लास पर असर: सेक्टर-वाइज ब्रेकडाउन

रिटेल सेक्टर: बढ़ी इनकम से FMCG डिमांड 12% बढ़ सकती है, कंपनियां जैसे HUL और ITC को बूस्ट।

ऑटो सेक्टर: अफोर्डेबल EMI से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की सेल्स 15% ऊपर, Maruti Suzuki और Tata Motors जैसे ब्रांड्स फायदे में।

हेल्थकेयर: 80D डिडक्शन से इंश्योरेंस पॉलिसीज 20% बढ़ेंगी, Apollo Hospitals और Max Healthcare को ग्रोथ।

रियल एस्टेट: होम लोन रिलीफ से हाउसिंग डिमांड 10% ऊपर, DLF और Godrej Properties जैसे डेवलपर्स को लाभ।

इन्वेस्टमेंट: NPS बदलाव से म्यूचुअल फंड्स और स्टॉक मार्केट में इनफ्लो ₹50,000 करोड़ extra, Sensex को सपोर्ट।

टैक्सपेयर्स के लिए प्रैक्टिकल टिप्स बजट से पहले

अपनी इनकम को रिव्यू करें: अगर ₹12 लाख से ऊपर है, तो नई रिजीम में स्विच करने से पहले कैलकुलेट करें।

हेल्थ इंश्योरेंस रिन्यू: अगर 80D आता है, तो फैमिली कवरेज बढ़ाएं।

NPS में इन्वेस्ट: एंप्लॉयर कंट्रीब्यूशन चेक करें, सालाना ₹50,000 तक एक्स्ट्रा सेविंग।

होम लोन रिस्ट्रक्चर: इंटरेस्ट रेट्स लॉक करें, अगर डिडक्शन बढ़ता है तो EMI घटेगी।

टैक्स सॉफ्टवेयर यूज: ClearTax या TaxSpanner जैसे टूल्स से सिमुलेशन रन करें।

ये टिप्स बजट अनाउंसमेंट के बाद इम्प्लीमेंट करने लायक हैं, जो FY 2026-27 से लागू होंगे।

पुरानी vs नई रिजीम: कंपेरिजन चार्ट

फीचरपुरानी रिजीमनई रिजीम (वर्तमान)नई रिजीम (अपेक्षित 2026)
स्टैंडर्ड डिडक्शन₹50,000₹75,000₹1,00,000
80C डिडक्शनउपलब्ध (₹1.5 लाख)अनुपलब्धपार्शियल (NPS only)
80D हेल्थउपलब्धअनुपलब्धउपलब्ध (₹25,000)
होम लोन इंटरेस्ट₹2 लाखअनुपलब्ध₹3 लाख तक
टैक्स स्लैब 30%₹10 लाख से ऊपर₹15 लाख से ऊपर₹30 लाख से ऊपर
टोटल सेविंग (₹15 लाख इनकम)₹1.2 लाख₹90,000₹1.5 लाख

यह चार्ट दिखाता है कि नई रिजीम अब ज्यादा अट्रैक्टिव हो रही है, खासकर युवा टैक्सपेयर्स के लिए जो कम डिडक्शंस क्लेम करते हैं।

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इकोनॉमिक इम्पैक्ट: ब्रॉडर पर्स्पेक्टिव

बजट 2026 में ये बदलाव GDP ग्रोथ को 0.5-1% बूस्ट दे सकते हैं, क्योंकि कंजम्प्शन 60% अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। इंफ्लेशन कंट्रोल के लिए GST रेट्स में कटौती भी संभावित, जैसे एसेंशियल्स पर 5% से घटाकर 0%। जॉब क्रिएशन के लिए स्किल डेवलपमेंट पर फोकस, जो इंडायरेक्टली टैक्स बेस बढ़ाएगा। स्टॉक मार्केट में बजट से पहले वोलेटिलिटी, लेकिन पॉजिटिव अनाउंसमेंट से Nifty 25,000 को क्रॉस कर सकता है।

सलाह: टैक्स प्लानिंग स्ट्रेटेजी

मल्टीपल इनकम सोर्सेज: फ्रीलांस इनकम को NPS में डायवर्ट करें।

फैमिली टैक्स ऑप्टिमाइजेशन: जॉइंट ITR फाइलिंग अगर कूपल्स दोनों कमाते हैं।

कैपिटल गेंस मैनेजमेंट: लॉन्ग-टर्म गेंस पर 0% टैक्स ₹12 लाख तक, लेकिन इंडेक्सेशन की मांग।

इंश्योरेंस मिक्स: टर्म + हेल्थ, बजट में डिडक्शन के लिए रेडी रहें।

बजट डे ट्रैकिंग: FM की स्पीच में कीवर्ड्स जैसे ‘रिलीफ’, ‘डिडक्शन’ पर फोकस।

ये स्ट्रेटेजीज टैक्स लायबिलिटी को 20-30% घटा सकती हैं, डिपेंडिंग ऑन इनकम लेवल।

Disclaimer: यह रिपोर्ट बजट अपेक्षाओं और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। वास्तविक बजट में बदलाव संभव हैं। टिप्स सामान्य सलाह हैं, पर्सनल फाइनेंशियल एडवाइजर से कंसल्ट करें।

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