“बजट 2026 में ऑटो सेक्टर ईवी सब्सिडी बढ़ाने, जीएसटी सुधारों, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और लोकलाइजेशन इंसेंटिव की मांग कर रहा है; स्कोडा जैसे ब्रांड्स इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करने पर जोर दे रहे हैं, जबकि JSW MG ईवी बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट चाहते हैं; कुल मिलाकर, सेक्टर स्थिर नीतियां और ग्रीन मोबिलिटी पर फोकस की उम्मीद रखता है, जो निर्यात को 24% बढ़ाने में मदद करेगा।”
ऑटोमोबाइल सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है, जो वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर व्हीकल मार्केट बन चुका है। बजट 2026 से पहले, स्कोडा, JSW MG, टोयोटा, ऑडी और अन्य दिग्गज कंपनियां अपनी उम्मीदें जाहिर कर रही हैं। ये उम्मीदें मुख्य रूप से ईवी ट्रांजिशन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, टैक्स रिफॉर्म्स और सप्लाई चेन रेजिलिएंस पर केंद्रित हैं। सेक्टर ने FY25 में ऑटो-कंपोनेंट प्रोडक्शन को 6.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया, जो 9.6% की सालाना वृद्धि दर्शाता है।
ईवी सेक्टर में बूस्ट की मांग
ईवी एडॉप्शन को तेज करने के लिए, सेक्टर PM E-DRIVE स्कीम और PLI-Auto का विस्तार चाहता है। JSW MG, जो SAIC के साथ पार्टनरशिप में ईवी पर फोकस्ड है, बैटरी गिगाफैक्ट्रीज के लिए नए इंसेंटिव की उम्मीद कर रहा है। कंपनी का मानना है कि बैटरी और कंपोनेंट लोकलाइजेशन पर सब्सिडी से ईवी की कीमतें 20-30% तक कम हो सकती हैं, जो दोपहिया और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में एडॉप्शन को 50% बढ़ा सकती है। स्कोडा ऑटो वोल्क्सवैगन के एमडी एंड सीईओ पियूष अरोड़ा ने कहा कि ईवी के लिए इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को रेशनलाइज करने से डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होगी, जो निर्यात को और बढ़ावा देगा।
ऑडी इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर बलवीर सिंह ढिल्लन ने हाई-स्पीड चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया, जहां वायबिलिटी गैप फंडिंग से लक्जरी ईवी सेगमेंट में 15-20% ग्रोथ संभव है। कुल मिलाकर, सेक्टर ईवी कंपोनेंट्स पर GST को एकसमान 5% करने की मांग कर रहा है, जो रॉ मटेरियल्स, सेल मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग को सपोर्ट करेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रोड डेवलपमेंट पर फोकस
| प्रमुख ईवी उम्मीदें | विवरण | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|
| PLI स्कीम का विस्तार | नए आवेदकों और सब-सिस्टम्स को शामिल करना | लोकलाइजेशन रेट 70% तक बढ़ना |
| बैटरी सब्सिडी | गिगाफैक्ट्रीज के लिए टैक्स ब्रेक | ईवी कॉस्ट में 25% कमी |
| चार्जिंग इंफ्रा | वायबिलिटी गैप फंडिंग | 2027 तक 1 लाख चार्जिंग स्टेशन्स |
| GST रेशनलाइजेशन | सभी ईवी पार्ट्स पर 5% रेट | अफोर्डेबल ईवी मार्केट ग्रोथ 40% |
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को प्राथमिकता देने की बात कही, जहां रोड और ट्रांसपोर्ट पर बढ़ा आवंटन सेक्टर की ग्रोथ को सपोर्ट करेगा। स्कोडा और JSW MG जैसे ब्रांड्स का मानना है कि बेहतर रोड नेटवर्क से लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी बढ़ेगी, जो सप्लाई चेन डिसरप्शन्स को 15% तक कम कर सकता है। सेक्टर की उम्मीद है कि बजट में रोड इंफ्रा के लिए 10-15% ज्यादा फंडिंग हो, जो मैन्युफैक्चरिंग लोकलाइजेशन को बढ़ावा देगी।
इसके अलावा, ग्रीन मोबिलिटी के लिए रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन पर जोर है। JSW MG, जो ईवी में निवेश कर रहा है, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की मांग कर रहा है, जो रूरल मार्केट्स में ईवी एडॉप्शन को 30% बूस्ट दे सकता है।
टैक्स और ड्यूटी सुधार
GST 2.0 के बाद, सेक्टर और सुधार चाहता है। स्कोडा ने ईवी रिपेयर्स पर GST कट की मांग की, जबकि JSW MG फिनिश्ड प्रोडक्ट्स पर सेलेक्टिव ड्यूटी बढ़ाने का सुझाव दे रहा है, जो मेक इन इंडिया को सपोर्ट करेगा। EY इंडिया की पार्टनर पारुल नागपाल के अनुसार, बजट में ईवी सेगमेंट के लिए नए इंसेंटिव आ सकते हैं, जैसे कमर्शियल व्हीकल्स पर सब्सिडी, जो निर्यात को 24% सालाना बढ़ाने में मदद करेगा।
ऑटो-कंपोनेंट मेकर्स को कंसेशन की उम्मीद है, जहां इनवर्टेड ड्यूटी को ठीक करने से कॉस्ट कम होगी। सेक्टर की कुल मांग है कि GST फ्रेमवर्क को फाइन-ट्यून किया जाए, जो वैल्यू चेन में ऑप्टिमाइजेशन लाएगा।
GST रेशनलाइजेशन : पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ब्रेक असेंबली जैसे पार्ट्स पर 28% से 18% रेट पहले ही कम हुआ, अब सभी ईवी पार्ट्स पर 5% की मांग।
इंसेंटिव स्कीम्स : SPMEPCI और PLI-ACC का एक्सटेंशन, जो एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स को बूस्ट देगा।
डिमांड स्टिमुलस : फर्स्ट-टाइम बायर्स के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन, जो रूरल मार्केट्स में 20% सेल्स बढ़ा सकता है।
सप्लाई चेन रेजिलिएंस और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस
सेक्टर शिपिंग डिसरप्शन्स और US टैरिफ्स से प्रभावित है, इसलिए बजट से रेयर अर्थ मैग्नेट स्ट्रैटेजी का क्लियर इम्प्लिमेंटेशन चाहता है। JSW MG जैसे प्लेयर्स सप्लाई चेन सिक्योरिटी पर फोकस कर रहे हैं, जहां रॉ मटेरियल ड्यूटीज को रेशनलाइज करने से कॉस्ट प्रेडिक्टेबिलिटी आएगी। ग्रांट थॉर्नटन के अनुसार, बजट में सप्लाई चेन रेजिलिएंस के लिए मेजर्स से सेक्टर की ग्रोथ 10% सालाना बनी रहेगी।
स्कोडा ने पॉलिसी कंटिन्यूटी पर जोर दिया, जहां लॉन्ग-टर्म फ्रेमवर्क से निवेशकों का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। कुल मिलाकर, सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी के साथ सिंक चाहता है, जो भारत को ग्लोबल ऑटो हब बना सकता है।
अन्य प्रमुख सेगमेंट्स की उम्मीदें
लक्जरी ऑटो सेक्टर, जैसे ऑडी, मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबिलिटी और डिस्पोजेबल इनकम्स पर फोकस कर रहा है। JSW MG ईवी एक्सपोर्ट को बूस्ट करने के लिए FTA का लाभ उठाना चाहता है, जहां UK और EU के साथ हाल के एग्रीमेंट्स से ड्यूटी कट से निर्यात 25% बढ़ सकता है। सेक्टर की कुल अपील है कि बजट शॉर्ट-टर्म डिमांड स्टिमुलस और स्ट्रक्चरल इंसेंटिव का बैलेंस बनाए।
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