“बजट 2026 में STT में वृद्धि से फ्यूचर्स पर टैक्स 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15% हो गया, जिससे बाजार में गिरावट आई; शेयर बाजार में 1800-2500 पॉइंट्स की गिरावट दर्ज हुई, जबकि ब्रोकरेज स्टॉक्स 8-12% गिरे; एक्सपर्ट्स की राय में यह सट्टेबाजी कम कर सकता है लेकिन लिक्विडिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर पड़ेगा।”
बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसने शेयर बाजार को झटका दिया। फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया, जो 150% की वृद्धि है। वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर STT को 0.10% से 0.15% कर दिया गया, जो 50% की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस फैसले का उद्देश्य डेरिवेटिव्स सेगमेंट में अत्यधिक सट्टेबाजी को नियंत्रित करना है, लेकिन इससे ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ गई है। उदाहरण के लिए, 1 करोड़ रुपये के फ्यूचर्स टर्नओवर पर अतिरिक्त 10,000 रुपये का बोझ पड़ेगा, जो हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और रिटेल पार्टिसिपेंट्स के मुनाफे को कम करेगा।
बाजार की प्रतिक्रिया तीव्र रही। स्पेशल ट्रेडिंग सेशन में BSE Sensex 2,500 पॉइंट्स तक गिरा, जबकि Nifty 50 24,600 के नीचे फिसल गया। ब्रोकरेज और एक्सचेंज से जुड़े स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखी गई। Multi Commodity Exchange के शेयर्स 11.60% गिरकर 2,232.15 रुपये पर बंद हुए, Angel One 8.61% गिरकर 2,320 रुपये पर पहुंचा। BSE Ltd और Groww की पैरेंट कंपनी के शेयर्स 10-13.5% तक लुढ़के। Nifty VIX में तेज उछाल आया, जो बाजार की चिंता को दर्शाता है।
STT बढ़ोतरी के प्रभाव को समझने के लिए, ट्रेडिंग कॉस्ट का ब्रेकडाउन देखें:
| ट्रांजेक्शन टाइप | पुराना STT (%) | नया STT (%) | 1 लाख रुपये के ट्रेड पर अतिरिक्त कॉस्ट (रुपये) |
|---|---|---|---|
| फ्यूचर्स सेल | 0.02 | 0.05 | 30 |
| ऑप्शन सेल | 0.10 | 0.15 | 50 |
| ऑप्शन एक्सरसाइज | 0.125 | 0.15 | 25 |
यह बदलाव हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) फर्म्स और मार्केट मेकर्स को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा, क्योंकि उनकी प्रॉफिटेबिलिटी ट्रांजेक्शन कॉस्ट पर निर्भर है। रिटेल ट्रेडर्स, जो F&O में 90% से ज्यादा वॉल्यूम कंट्रिब्यूट करते हैं, अब छोटे मुनाफे वाले स्ट्रैटेजी से दूर हो सकते हैं। सरकारी इरादा सिस्टेमिक रिस्क कम करना है, लेकिन एक्सपर्ट्स चेताते हैं कि इससे लिक्विडिटी घट सकती है, जो हेजिंग और प्राइस डिस्कवरी को प्रभावित करेगा।
STT बढ़ोतरी के नुकसान:
ट्रेडिंग कॉस्ट में वृद्धि : हर ट्रेड पर टैक्स बढ़ने से नेट प्रॉफिट घटेगा, खासकर लॉस-मेकिंग ट्रेड्स में जहां STT अभी भी देय है।
रिटेल पार्टिसिपेशन में कमी : डे ट्रेडर्स और स्कैल्पर्स के लिए कई स्ट्रैटेजी अनवायबल हो जाएंगी, जिससे युवा निवेशकों का उत्साह कम होगा।
मार्केट लिक्विडिटी पर असर : कम ट्रेड्स से वॉल्यूम घटेगा, जो वोलेटिलिटी बढ़ा सकता है और बिड-आस्क स्प्रेड को चौड़ा करेगा।
ब्रोकरेज और एक्सचेंज पर दबाव : F&O ब्रोकरेज रेवेन्यू का 44% हिस्सा है; वॉल्यूम कम होने से कंपनियां जैसे Angel One और BSE प्रभावित होंगी।
फॉरेन इन्वेस्टर्स का आकर्षण कम : FPIs ग्लोबल मार्केट्स से तुलना करते हैं; ऊंची कॉस्ट भारत को कम प्रतिस्पर्धी बनाएगी।
शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट पर प्रभाव : बजट डे पर प्रॉफिट बुकिंग बढ़ी, जो शॉर्ट-टर्म करेक्शन ट्रिगर कर सकती है।
हालांकि, कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं। सरकार का मानना है कि यह लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग को बढ़ावा देगा, क्योंकि कैश मार्केट पर कोई बदलाव नहीं है। डाइवर्सिफाइड ब्रोकरेज फर्म्स, जैसे Angel One, जहां F&O केवल 44% रेवेन्यू है, जबकि इंटरेस्ट इनकम और अन्य सेगमेंट 33% हैं, बेहतर तरीके से सामना कर सकती हैं।
अब तीन एक्सपर्ट्स की राय:
एक्सपर्ट 1: शंकर शर्मा (एस इन्वेस्टर) शर्मा ने STT बढ़ोतरी का स्वागत किया और F&O ट्रेडिंग को ‘पॉइजन’ और ‘कोकेन’ की तरह बताया। उनके अनुसार, यह युवाओं की पीढ़ियों को नुकसान पहुंचा रहा है। वे मानते हैं कि यह सट्टेबाजी कम करेगा और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग को प्रोत्साहित करेगा, हालांकि शॉर्ट-टर्म में मार्केट अनसेटल हो सकता है। शर्मा का मानना है कि सरकार का कदम बाजार की स्थिरता के लिए जरूरी है, जो सिस्टेमिक रिस्क को घटाएगा।
एक्सपर्ट 2: जीमित मोदी (SAMCO ग्रुप के फाउंडर और CEO) मोदी ने STT बढ़ोतरी को नकारात्मक बताया, क्योंकि यह ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ाती है और मार्केट लिक्विडिटी को नुकसान पहुंचाती है। उनके अनुसार, जब भारत को ग्लोबल फ्लोज आकर्षित करने की जरूरत है, तब फ्रिक्शनल कॉस्ट बढ़ाना गलत सिग्नल देता है। मोदी चेताते हैं कि इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होगा, जो हेजिंग एफिशिएंसी को प्रभावित करेगा और कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम के लिए हेडविंड बनेगा।
एक्सपर्ट 3: अमित मजूमदार (Angel One के ग्रुप चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर) मजूमदार का नजरिया न्यूट्रल है। वे कहते हैं कि STT बढ़ोतरी सट्टेबाजी को कंट्रोल करेगी, लेकिन डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल वाली कंपनियां इससे बच सकती हैं। Angel One में F&O केवल 44% रेवेन्यू है, जबकि वेल्थ, क्रेडिट और एसेट मैनेजमेंट से स्थिर आय है। मजूमदार का मानना है कि लॉन्ग-टर्म में बाजार की रेजिलिएंस बनी रहेगी, हालांकि शॉर्ट-टर्म में ब्रोकरेज स्टॉक्स पर दबाव रहेगा।
एक्सपर्ट्स की राय से साफ है कि STT बढ़ोतरी शॉर्ट-टर्म में बाजार को गिरा सकती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में स्थिरता ला सकती है। ट्रेडर्स को अब लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी अपनानी होगी, जबकि FPIs भारत की तुलना अन्य मार्केट्स से करेंगे। कुल मिलाकर, यह बदलाव कैपिटल मार्केट को ज्यादा成熟 बनाएगा, लेकिन ट्रेडिंग एक्टिविटी में 20-30% की कमी आ सकती है।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है, जो रिपोर्ट्स, टिप्स और सोर्सेज पर आधारित है।