“भारत सरकार ने स्टार्टअप की परिभाषा में बड़ा बदलाव किया है, जहां सामान्य स्टार्टअप्स के लिए टर्नओवर सीमा ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दी गई है, जबकि डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए 20 साल की पात्रता और ₹300 करोड़ की सीमा तय की गई है। सहकारी समितियों को भी शामिल किया गया है, जिससे इनोवेशन और R&D को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने का लक्ष्य है।”
भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम के तहत स्टार्टअप की परिभाषा को व्यापक रूप से संशोधित किया है। इस बदलाव के तहत, किसी इकाई को स्टार्टअप के रूप में मान्यता तब तक मिलेगी जब तक उसका टर्नओवर किसी भी वित्तीय वर्ष में ₹200 करोड़ से अधिक न हो। पहले यह सीमा ₹100 करोड़ थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है। यह परिवर्तन स्टार्टअप्स को लंबे समय तक सरकारी लाभ जैसे टैक्स छूट, फंडिंग स्कीम्स और रेगुलेटरी राहत प्रदान करने के लिए किया गया है।
डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अलग से एक नई श्रेणी बनाई गई है, जहां पात्रता की समय सीमा को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है। इन स्टार्टअप्स का टर्नओवर किसी भी वर्ष ₹300 करोड़ से अधिक नहीं होना चाहिए। डीप टेक स्टार्टअप्स वे हैं जो विज्ञान या इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नई जानकारी या प्रगति पर आधारित समाधान विकसित करते हैं, जिनमें R&D पर उच्च व्यय होता है और नवीन बौद्धिक संपदा (IP) का निर्माण शामिल होता है। इन स्टार्टअप्स को मान्यता के दौरान गैर-उत्पादक या सट्टेबाजी वाली संपत्तियों में निवेश करने की अनुमति नहीं है, जो उनके कोर बिजनेस से जुड़ी होनी चाहिए।
इसके अलावा, मल्टी-स्टेट और स्टेट-रजिस्टर्ड सहकारी समितियों को भी स्टार्टअप की परिभाषा में शामिल किया गया है। इससे कृषि, ग्रामीण विकास और संबद्ध क्षेत्रों में इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि सहकारी समितियां अब स्टार्टअप इंडिया के लाभ उठा सकेंगी। हालांकि, किसी मौजूदा बिजनेस के विभाजन या पुनर्गठन से बनी इकाई को स्टार्टअप नहीं माना जाएगा।
पुरानी और नई परिभाषा की तुलना
नीचे दी गई तालिका में स्टार्टअप की पुरानी और नई पात्रता मानदंडों की तुलना की गई है:
| पैरामीटर | पुरानी परिभाषा (2019) | नई परिभाषा (2026) |
|---|---|---|
| सामान्य स्टार्टअप्स की आयु सीमा | निगमन से 10 साल तक | निगमन से 10 साल तक |
| सामान्य स्टार्टअप्स की टर्नओवर सीमा | ₹100 करोड़ तक | ₹200 करोड़ तक |
| डीप टेक स्टार्टअप्स की आयु सीमा | कोई अलग श्रेणी नहीं | निगमन से 20 साल तक |
| डीप टेक स्टार्टअप्स की टर्नओवर सीमा | लागू नहीं | ₹300 करोड़ तक |
| सहकारी समितियों की समावेशिता | शामिल नहीं | मल्टी-स्टेट और स्टेट-रजिस्टर्ड शामिल |
| निवेश प्रतिबंध | सीमित | सट्टेबाजी या गैर-उत्पादक संपत्तियों पर सख्त प्रतिबंध |
यह तालिका दर्शाती है कि बदलाव मुख्य रूप से स्टार्टअप्स को विकास के विभिन्न चरणों में समर्थन देने के लिए हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां R&D की प्रक्रिया लंबी होती है।
डीप टेक स्टार्टअप्स पर फोकस क्यों?
डीप टेक स्टार्टअप्स में AI, बायोटेक, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और स्पेस टेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां उत्पाद विकास में वर्षों लगते हैं और कैपिटल इंटेंसिव होता है। सरकार का मानना है कि ऐसे स्टार्टअप्स मौजूदा सीमाओं से जल्दी बाहर हो जाते हैं, जबकि वे अभी भी विकासशील चरण में होते हैं। नई नीति से इन स्टार्टअप्स को लंबे समय तक सेक्शन 80-IAC के तहत टैक्स छूट, सरकारी फंडिंग जैसे Seed Fund Scheme और Credit Guarantee Scheme का लाभ मिलेगा। उदाहरण के लिए, एक डीप टेक फर्म जो R&D पर अपनी राजस्व का 30% से अधिक खर्च करती है और नवीन IP विकसित कर रही है, अब 20 साल तक स्टार्टअप मान्यता बनाए रख सकती है।
सहकारी समितियों का समावेशन: एक नया आयाम
सहकारी समितियों को शामिल करने से स्टार्टअप इकोसिस्टम को ग्रामीण और कृषि-आधारित इनोवेशन की ओर विस्तार मिलेगा। अब ये समितियां Agri-tech, Rural Fintech या Sustainable Farming जैसे क्षेत्रों में स्केलेबल मॉडल विकसित कर स्टार्टअप लाभ ले सकेंगी। इससे रोजगार सृजन और धन सृजन की क्षमता बढ़ेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सहकारी मॉडल पहले से मजबूत है। सरकार का अनुमान है कि इससे हजारों सहकारी इकाइयां स्टार्टअप इंडिया से जुड़ेंगी, जो पहले बाहर थीं।
बदलाव के पीछे का उद्देश्य
यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और भारत को ग्लोबल इनोवेशन हब बनाने के लिए उठाया गया है। स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत 2016 से अब तक 200,000 से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिल चुकी है, लेकिन कई फर्म्स विकास के दौरान लाभ से वंचित हो जाती थीं। नई नीति से इनोवेशन, उत्पाद या प्रक्रिया सुधार पर फोकस बढ़ेगा, साथ ही स्केलेबल बिजनेस मॉडल को प्रोत्साहन मिलेगा। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव भारत को टेक्नोलॉजी एडॉप्शन से टेक्नोलॉजी इनोवेशन की ओर ले जाएगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने कहा कि ये सुधार स्टार्टअप यात्रा को अगले चरण में ले जाएंगे और देश की इनोवेशन स्थिति को मजबूत करेंगे।
स्टार्टअप इकोसिस्टम पर प्रभाव
नई परिभाषा से स्टार्टअप्स को लंबे समय तक लाभ मिलेंगे, जैसे सरकारी फंडिंग, टैक्स इंसेंटिव और रेगुलेटरी ईज। उदाहरणस्वरूप, सेक्शन 80-IAC के तहत केवल 2% स्टार्टअप्स को टैक्स छूट मिलती है, लेकिन अब अधिक फर्म्स योग्य होंगी। डीप टेक क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, क्योंकि लंबी पात्रता से निवेशक आकर्षित होंगे। सहकारी समितियों के शामिल होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इनोवेशन आएगा, जो भारत के GDP में महत्वपूर्ण योगदान देता है। कुल मिलाकर, यह नीति स्टार्टअप्स को उच्च रोजगार और धन सृजन की क्षमता वाले मॉडल की ओर निर्देशित करेगी।
मुख्य लाभ और चुनौतियां
लाभ : बढ़ी हुई टर्नओवर सीमा से स्टार्टअप्स ग्रोथ फेज में रहते हुए लाभ ले सकेंगी। डीप टेक को 20 साल की विंडो से R&D-हैवी प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट मिलेगा। सहकारी समितियां अब इनोवेटिव सॉल्यूशंस जैसे डिजिटल कोऑपरेटिव्स विकसित कर सकेंगी।
चुनौतियां : डीप टेक मान्यता के लिए सख्त क्राइटेरिया जैसे उच्च R&D व्यय और IP फोकस को साबित करना होगा। निवेश प्रतिबंध से कुछ फर्म्स प्रभावित हो सकती हैं।
यह बदलाव उद्योग हितधारकों और मंत्रालयों के परामर्श के बाद लागू किया गया है, जो स्टार्टअप्स को लंबे इनोवेशन साइकिल और कैपिटल इंटेंसिटी को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट है, विभिन्न स्रोतों पर आधारित टिप्स और जानकारी प्रदान करती है।