“गुजरात का भरथना टोल प्लाजा देश में सबसे ज्यादा रेवेन्यू जेनरेट करने वाला टोल नाका है, जहां पिछले 5 वर्षों में 2,043.81 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन हुआ। सालाना 1 करोड़ से अधिक वाहन यहां से गुजरते हैं, मुख्य रूप से कमर्शियल ट्रक और फ्रेट वाहन, जो दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की वजह से इसे व्यस्त बनाते हैं।”
भरथना टोल प्लाजा: देश का सबसे ज्यादा कमाई वाला टोल नाका
गुजरात के वडोदरा-भरूच सेक्शन पर स्थित भरथना टोल प्लाजा भारत में सबसे अधिक टोल वसूली करने वाला प्लाजा बना हुआ है। यह नेशनल हाइवे-48 (NH-48) पर है, जो दिल्ली से मुंबई तक जाने वाले प्रमुख इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कॉरिडोर का हिस्सा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 से 2023-24 तक के 5 वर्षों में यहां से कुल 2,043.81 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन हुआ, जिसमें अकेले 2023-24 में 472.65 करोड़ रुपये शामिल हैं। यह आंकड़ा इसे देश के अन्य टोल प्लाजाओं से काफी आगे रखता है।
इस प्लाजा की उच्च कमाई का मुख्य कारण भारी ट्रैफिक है। यहां हर साल 1 करोड़ से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। इनमें ज्यादातर कमर्शियल ट्रक, कंटेनर वाहन और फ्रेट ट्रक होते हैं। गुजरात के मैन्युफैक्चरिंग हब, टेक्सटाइल इंडस्ट्री, डायमंड प्रोसेसिंग और प्रमुख पोर्ट्स जैसे कांडला और मुंद्रा से जुड़ाव के कारण यह रूट इंडस्ट्रियल ट्रांसपोर्ट का प्रमुख केंद्र है।
ट्रैफिक और कमाई के प्रमुख कारण
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर : NH-48 दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुजरात में स्थित बड़े-बड़े इंडस्ट्रियल जोन से माल की ढुलाई लगातार चलती रहती है।
पोर्ट कनेक्टिविटी : मुंद्रा और कांडला पोर्ट्स से निर्यात-आयात का बड़ा हिस्सा इसी हाइवे से होकर गुजरता है, जिससे ट्रक ट्रैफिक बढ़ता है।
FASTag का प्रभाव : FASTag लागू होने के बाद टोल कलेक्शन में तेजी आई है। चोरी और देरी कम हुई, जिससे दैनिक औसत कलेक्शन बढ़ा। देश में कुल टोल कलेक्शन FY25 में 61,408 करोड़ रुपये तक पहुंचा, और FY26 में यह 75,000 करोड़ रुपये के आसपास अनुमानित है।
वाहन प्रकार : यहां कारों की तुलना में ट्रक और हैवी व्हीकल ज्यादा हैं, जिनका टोल रेट ऊंचा होता है।
टॉप 5 सबसे ज्यादा कमाई वाले टोल प्लाजा की तुलना
| रैंक | टोल प्लाजा का नाम | राज्य | हाइवे | 5 वर्षों में कलेक्शन (करोड़ रुपये) | प्रमुख वजह |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | भरथना | गुजरात | NH-48 | 2,043.81 | इंडस्ट्रियल ट्रैफिक, पोर्ट कनेक्टिविटी |
| 2 | शाहजहांपुर | राजस्थान | NH-48 | 1,884.46 | दिल्ली-जयपुर-मुंबई रूट, कम्यूटर ट्रैफिक |
| 3 | जलाधुलागोरी | पश्चिम बंगाल | NH-16 | 1,538.91 | कोलकाता-चेन्नई कॉरिडोर, फ्रेट मूवमेंट |
| 4 | बड़ाजोर | उत्तर प्रदेश | NH-19 | 1,480.75 | ग्रैंड ट्रंक रोड, दिल्ली-कोलकाता |
| 5 | घरौंडा | हरियाणा | NH-44 | 1,314 (अनुमानित) | पानipat-जालंधर सेक्शन, नॉर्दर्न ट्रैफिक |
ये आंकड़े 2019-20 से 2023-24 के हैं, और हालिया वर्षों में ट्रैफिक वृद्धि के साथ कलेक्शन और बढ़ा है।
देश में टोल सिस्टम की स्थिति
देश में जून 2025 तक 1,087 टोल प्लाजा संचालित हैं। ये प्लाजा रोजाना औसतन 168 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाते हैं। FASTag से 98% से अधिक कलेक्शन इलेक्ट्रॉनिक हो गया है, जिससे कुशलता बढ़ी। पिछले 5 वर्षों (2020-21 से 2024-25) में कुल टोल कलेक्शन 2.27 लाख करोड़ रुपये रहा। गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य टोल रेवेन्यू में आगे हैं, क्योंकि यहां प्रमुख हाइवे और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी ज्यादा है।
भरथना प्लाजा की सफलता भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और इकोनॉमिक ग्रोथ का प्रतीक है, जहां हाइवे न सिर्फ कनेक्टिविटी देते हैं बल्कि सरकारी राजस्व का बड़ा स्रोत भी बनते हैं।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न सरकारी आंकड़ों और उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित है। टोल रेट और कलेक्शन में बदलाव संभव हैं।