अमेरिका में गौतम अदाणी और उनके सहयोगियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का असर अब Adani Green Energy पर दिख रहा है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में स्पष्ट किया कि वह अमेरिकी जांच का हिस्सा नहीं है और उसके कारोबार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। निवेशकों में चिंता के बीच शेयरों में गिरावट आई, लेकिन कंपनी ने कानूनी अनुपालन की पुष्टि की।
अमेरिका में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके कुछ सहयोगियों पर लगे भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोपों की लपटें अब Adani Green Energy Limited तक पहुंच गई हैं। कंपनी ने हाल ही में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भेजी गई फाइलिंग में इस मामले पर सफाई दी है। फाइलिंग के अनुसार, Adani Green Energy या उसकी कोई सब्सिडियरी इस अमेरिकी जांच का हिस्सा नहीं है। कंपनी ने जोर देकर कहा कि उसके सभी कारोबार और अनुबंध पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी हैं, तथा किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया गया है।
इस फाइलिंग का मुख्य उद्देश्य निवेशकों की चिंताओं को दूर करना था, क्योंकि अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा अदाणी ग्रुप पर लगाए गए आरोपों के बाद Adani Green के शेयरों में गिरावट देखी गई। आरोपों में मुख्य रूप से सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़े ब्राइबरी स्कैंडल का जिक्र है, जहां अदाणी ग्रुप पर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने और भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने का इल्जाम लगाया गया है। हालांकि, Adani Green ने स्पष्ट किया कि उसके अमेरिकी बाजार में कोई डायरेक्ट एक्सपोजर नहीं है और कंपनी की सभी फंडिंग और प्रोजेक्ट्स इंडिपेंडेंट ऑडिट से गुजरे हैं।
कंपनी की फाइलिंग में प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
कोई जांच का हिस्सा नहीं : Adani Green Energy ने कहा कि अमेरिकी एजेंसियों द्वारा अदाणी ग्रुप के कुछ सदस्यों पर लगाए गए आरोपों में कंपनी या उसके अधिकारियों का नाम शामिल नहीं है। यह सफाई इसलिए जरूरी हो गई क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स में पूरे ग्रुप को एक साथ जोड़ा जा रहा था।
कारोबार पर प्रभाव : फाइलिंग में उल्लेख है कि कंपनी के ऑपरेशंस, फाइनेंशियल पोजिशन या फ्यूचर प्लांस पर इस मामले का कोई नेगेटिव इंपैक्ट नहीं पड़ा है। Adani Green के पास भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 GW से अधिक की रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी है, और कंपनी 2030 तक 45 GW का टारगेट हासिल करने पर फोकस्ड है।
कानूनी अनुपालन : कंपनी ने अपने सभी कॉन्ट्रैक्ट्स और फाइनेंशियल डीलिंग्स में पूर्ण अनुपालन की पुष्टि की। इसमें FCPA (Foreign Corrupt Practices Act) और अन्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन शामिल है।
Adani Green के शेयरों पर नजर डालें तो, इस सफाई के बाद भी मार्केट में उतार-चढ़ाव देखा गया। NSE पर कंपनी के शेयर हाल ही में 5-7% की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे, लेकिन फाइलिंग के बाद रिकवरी के संकेत मिले। निवेशकों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि Adani Green भारत की प्रमुख ग्रीन एनर्जी कंपनियों में से एक है, और उसके प्रोजेक्ट्स में सरकारी सब्सिडी और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग शामिल है।
इस मामले की पृष्ठभूमि में, अमेरिकी अभियोजकों ने अदाणी ग्रुप पर आरोप लगाया कि सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने के लिए करोड़ों डॉलर की रिश्वत दी गई। अदाणी ग्रुप ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है। Adani Green की तरफ से यह फाइलिंग एक प्रिवेंटिव स्टेप मानी जा रही है, ताकि ग्रुप-लेवल केस का असर सब्सिडियरी कंपनियों पर न पड़े।
कंपनी के प्रमुख प्रोजेक्ट्स और उनके स्टेटस पर एक नजर:
| प्रोजेक्ट नाम | लोकेशन | कैपेसिटी (MW) | स्टेटस | अपेक्षित पूरा होने की तारीख |
|---|---|---|---|---|
| Khavda Solar Park | गुजरात | 30,000 | निर्माणाधीन | 2027 |
| Rajasthan Wind-Solar Hybrid | राजस्थान | 2,140 | ऑपरेशनल | पूरा |
| Azure Power Acquisition | विभिन्न | 1,000+ | इंटीग्रेटेड | 2025 |
| SB Energy Portfolio | भारत | 4,900 | एक्वायर्ड | ऑपरेशनल |
| International Expansion (Australia) | ऑस्ट्रेलिया | 1,000 | प्लान्ड | 2028 |
ये प्रोजेक्ट्स दिखाते हैं कि Adani Green की ग्रोथ स्ट्रैटेजी मजबूत है, और अमेरिकी केस के बावजूद कंपनी अपने टारगेट्स पर फोकस्ड है। फाइलिंग में कंपनी ने यह भी जोड़ा कि उसके सभी फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स ऑडिटेड हैं और कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
निवेशकों के लिए सलाह के रूप में, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी आम है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में Adani Green की पोजिशन मजबूत बनी रहेगी, खासकर भारत सरकार की रिन्यूएबल एनर्जी पुश को देखते हुए। कंपनी ने आगे कहा कि वह किसी भी जांच में सहयोग करने को तैयार है, लेकिन फिलहाल कोई नोटिस नहीं मिला है।
इस सफाई के बाद, मार्केट एनालिस्ट्स ने Adani Green को ‘होल्ड’ रेटिंग दी है, जबकि कुछ ब्रोकरेज हाउसेज ने टारगेट प्राइस बढ़ाया है। उदाहरण के लिए, एक प्रमुख ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट 2,000 रुपये से ऊपर रखा है, जो कंपनी की ग्रीन एनर्जी लीडरशिप पर आधारित है।
अंत में, यह फाइलिंग अदाणी ग्रुप के लिए एक डैमेज कंट्रोल मूव है, जो दिखाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय केस भारतीय कंपनियों के लिए चैलेंज बन सकते हैं। Adani Green ने जोर देकर कहा कि उसके कारोबार की नींव मजबूत है और निवेशक बिना चिंता के आगे बढ़ सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।