“बजट 2026 में TDS दरों में कमी की उम्मीद, मानक कटौती बढ़कर 1 लाख रुपये हो सकती है, GST सुधारों से कारोबार आसान होगा, और कॉर्पोरेट टैक्स में राहत से निवेश बढ़ेगा, जिससे मध्यम वर्ग और उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी।”
बजट 2026 में अपेक्षित टैक्स सुधार
बजट 2026 में TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) दरों की रेशनलाइजेशन पर फोकस रहेगा। EY इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, TDS दरों को तीन-चार स्तरों तक सीमित करने का रोडमैप तैयार किया जा सकता है, जो वर्तमान जटिल संरचना से राहत देगा। इससे B2B पेमेंट्स पर GST लागू होने वाले मामलों में नकदी प्रवाह बेहतर होगा।
KPMG की अपेक्षाओं में सैलरीड कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का सुझाव है, जो महंगाई और बढ़ती जीवन लागत को ध्यान में रखते हुए है। इससे मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को सालाना 5,000 से 10,000 रुपये की अतिरिक्त बचत हो सकती है।
GST में विवाद कम करने के लिए रिफंड प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकता है, जैसे एडवांस रूलिंग की वैलिडिटी बढ़ाना और कस्टम्स डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन स्कीम लाना। रियल एस्टेट सेक्टर में GST राहत से अफोर्डेबल हाउसिंग पर टैक्स बोझ कम होगा, जो डेवलपर्स को बड़े प्रोजेक्ट्स प्लान करने में मदद करेगा।
संभावित TDS दरों में बदलाव
कॉर्पोरेट टैक्स में राहत के प्रमुख बिंदु
| वर्तमान TDS श्रेणी | मौजूदा दर (%) | अपेक्षित दर (%) | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| सैलरी पेमेंट्स | 2-30 | 5-10 | कम कटौती से नकदी प्रवाह बेहतर |
| कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट्स | 1-10 | 2-5 | MSME को राहत, अनुपालन आसान |
| इंटरेस्ट पेमेंट्स | 10 | 5 | बचत खातों पर अधिक रिटर्न |
| रेंट पेमेंट्स | 5-10 | 2-5 | किरायेदारों को कम बोझ |
कॉर्पोरेट डील एक्टिविटी में 61.3 बिलियन USD की बढ़ोतरी के साथ, M&A पर टैक्स छूट बढ़ाने की मांग।
फॉरेन इन्वेस्टमेंट को प्रोत्साहन के लिए MAT (मिनिमम अल्टरनेट टैक्स) में छूट, जो IFSC यूनिट्स को फायदा देगी।
टैक्स लिटिगेशन के 5.4 लाख पेंडिंग अपील्स को कम करने के लिए फास्टर डिस्पोजल मैकेनिज्म।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में टैक्स सर्टेनिटी से निवेश 20% बढ़ सकता है।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव भारत की GDP ग्रोथ 7-7.5% रहने की उम्मीद में ये सुधार निजी निवेश को बढ़ावा देंगे। डेलॉयट की रिपोर्ट में उत्पादकता और फिस्कल रेजिलिएंस पर जोर, जो Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य से जुड़ा है। रियल एस्टेट में कैपिटल गेंस क्लैरिटी से डेवलपर्स लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर सकेंगे, जिससे रोजगार 15% बढ़ सकता है।
Disclaimer: यह लेख रिपोर्ट्स, अपेक्षाओं और ट्रेंड्स पर आधारित है। यह आधिकारिक घोषणा नहीं है और पाठकों को पेशेवर सलाह लेने की सिफारिश की जाती है।