एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने Q3FY26 में शुद्ध लाभ 61.6% घटकर 89.7 करोड़ रुपये पर पहुंचा, जबकि रेवेन्यू 6.4% गिरकर 4,114 करोड़ रुपये रहा। पोस्ट-दिवाली मांग में नरमी, होम अप्लायंसेज सेगमेंट में 9.8% गिरावट, बढ़ी हुई ऑपरेटिंग लागत और मार्जिन पर दबाव मुख्य वजहें रहीं। शेयर बाजार में कंपनी के शेयर 8% तक गिरे, लेकिन कुछ ब्रोकरेज ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखे हुए हैं।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के शेयरों में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जो कंपनी के दिसंबर 2025 तिमाही (Q3FY26) के कमजोर वित्तीय नतीजों के बाद आई। कंपनी का शेयर इंट्रा-डे में 8% तक फिसल गया, जबकि नतीजे घोषित होने के बाद निवेशकों में निराशा छा गई।
कंपनी ने Q3FY26 में कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 61.6% YoY घटकर 89.7 करोड़ रुपये पर पहुंचा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 233 करोड़ रुपये था। यह स्ट्रीट अनुमानों से काफी कम रहा, जहां एक्सपेक्टेशन 200 करोड़ रुपये के आसपास थी। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस भी 6.4% YoY घटकर 4,114 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 4,396 करोड़ रुपये था। EBITDA 42.4% गिरकर 196 करोड़ रुपये पर आ गया और मार्जिन 7.7% से घटकर 4.8% रह गया।
मुख्य वजह होम अप्लायंसेज एंड एयर सॉल्यूशंस (H&A) सेगमेंट में मांग की नरमी रही। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 9.8% YoY घटकर 2,788 करोड़ रुपये रहा। दिवाली के बाद उपभोक्ता खर्च में कमी आई, खासकर बड़े टिकट वाले प्रोडक्ट्स जैसे एयर कंडीशनर में। दिसंबर तिमाही में ठंडे मौसम के कारण AC की बिक्री प्रभावित हुई, जबकि अप्रैल-जून में अनसीजनल मौसम से पहले ही कैटेगरी दबाव में थी। कंपनी ने प्राइस कट से बचने का फैसला किया ताकि लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी बनी रहे, लेकिन इससे वॉल्यूम पर असर पड़ा।
ऑपरेटिंग खर्च बढ़े रहने से मार्जिन पर दबाव बढ़ा। रॉ मटेरियल कॉस्ट सेल्स के प्रतिशत के रूप में 70.6% पर पहुंच गई, जो पिछले साल 68.2% थी। सेल्स प्रमोशन खर्च भी ऊंचे रहे। हालांकि कुछ इनपुट कॉस्ट में नरमी आई, लेकिन कुल मिलाकर ऑपरेटिंग लीवरेज कमजोर रहा।
तिमाही में कंपनी ने महत्वपूर्ण कदम भी उठाए। उसने एक एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (APA) पूरा किया, जिससे 487.74 करोड़ रुपये की कंटिंजेंट लायबिलिटी खत्म हुई। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग एक्सपैंशन के लिए 705.74 करोड़ रुपये के गवर्नमेंट इंसेंटिव्स मिले। कंपनी एक्सपोर्ट दोगुना करने और तीसरे प्लांट की योजना पर काम कर रही है, जो फ्यूचर ग्रोथ के संकेत देता है।
नौ महीने (अप्रैल-दिसंबर 2025) में रेवेन्यू 16,551 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 16,918 करोड़ से थोड़ा कम है। नेट प्रॉफिट भी घटा।
कंपनी के शेयर पर ब्रोकरेज की राय मिली-जुली है। कुछ एनालिस्ट्स ने ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और 17-23% अपसाइड देख रहे हैं, क्योंकि कंपनी प्रीमियम प्रोडक्ट्स में लीडरशिप रखती है और इनोवेशन पर फोकस है। भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर FY29 तक 3 लाख करोड़ रुपये का होने का अनुमान है, जहां एनर्जी-एफिशिएंट और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ेगी।
मुख्य वित्तीय आंकड़े (Q3FY26 vs Q3FY25)
नेट प्रॉफिट: 89.7 करोड़ रुपये (61.6% ↓)
रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस: 4,114 करोड़ रुपये (6.4% ↓)
EBITDA: 196 करोड़ रुपये (42.4% ↓)
EBITDA मार्जिन: 4.8% (पिछले 7.7% से ↓)
H&A सेगमेंट रेवेन्यू: 2,788 करोड़ रुपये (9.8% ↓)
कंपनी ने प्राइस प्रोटेक्शन स्ट्रैटेजी अपनाई है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में मांग रिकवरी पर निर्भर रहेगी। Q4 में फेस्टिव सीजन और मौसम सुधार से सुधार की उम्मीद है।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट बाजार की स्थितियों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।