अमेरिका-ईरान युद्ध से मुकेश अंबानी को बड़ा झटका, 4 घंटे में डूबे ₹49 हजार करोड़; रिलायंस शेयर कैसे लुढ़के?

अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों से मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज़ हो गया है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतें 8-10% उछलकर $78-80 प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। इससे रिफाइनरी बिजनेस पर दबाव बढ़ा और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 2.5-3% गिरकर ₹1,358 के स्तर पर आए। मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भारी गिरावट आई, जहां शुरुआती ट्रेडिंग घंटों में कंपनी की मार्केट कैप में ₹40,000-50,000 करोड़ का नुकसान हुआ। जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी है और भारत के 40% से ज्यादा क्रूड इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट से आते हैं, जिसके बंद होने का खतरा बढ़ गया है।

अमेरिका-ईरान युद्ध से मुकेश अंबानी को बड़ा नुकसान, 4 घंटे में डूबे ₹49 हजार करोड़; समझें कैसे

अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक्स किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई टॉप अधिकारी मारे गए। ईरान ने जवाबी हमले किए, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट की नेविगेशन बंद कर दी गई। यह स्ट्रेट ग्लोबल ऑयल का 20% और भारत के क्रूड इम्पोर्ट का 40% से ज्यादा हिस्सा हैंडल करता है।

क्रूड ऑयल की कीमतें सोमवार सुबह 8-10% उछलीं। ब्रेंट क्रूड $78.8 प्रति बैरल पर पहुंचा, जबकि कुछ समय के लिए $82 तक गया। WTI भी 7.5% ऊपर ट्रेड हुआ। इस तेज़ उछाल से रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ा, क्योंकि इनपुट कॉस्ट बढ़ने से प्रॉफिट कम होता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिसकी जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी (1.24 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्षमता) है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। कंपनी का ऑयल-टू-केमिकल्स बिजनेस क्रूड पर निर्भर है। हाई ऑयल प्राइस से रिफाइनिंग स्प्रेड कम होता है, खासकर जब एक्सपोर्ट मार्केट में डिमांड प्रभावित हो।

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ट्रेडिंग शुरू होते ही रिलायंस के शेयर 2.58% गिरकर ₹1,358 पर बंद हुए। पिछले क्लोज ₹1,393.90 से यह गिरावट करीब 35-36 पॉइंट्स की थी। कंपनी की मार्केट कैप करीब ₹18.5 लाख करोड़ के आसपास है। शुरुआती 4 घंटों में (प्रे-ओपन और शुरुआती सेशन) गिरावट से मार्केट वैल्यू में ₹45,000-50,000 करोड़ का नुकसान अनुमानित है। मुकेश अंबानी, जो कंपनी में प्रमुख शेयरहोल्डर हैं, की पर्सनल नेटवर्थ में यह सीधा असर पड़ा।

यह गिरावट सिर्फ रिलायंस तक सीमित नहीं रही। पूरे ऑयल मार्केटिंग सेक्टर में 3-6% की गिरावट आई। IOC, BPCL और HPCL के शेयर 5-6% तक लुढ़के। सेंसेक्स 1.29% गिरकर 80,238 पर और निफ्टी 1.24% नीचे 24,865 पर बंद हुआ। निवेशक सेफ हैवन जैसे गोल्ड और डॉलर की ओर भागे।

क्यों रिलायंस सबसे ज्यादा प्रभावित?

जामनगर रिफाइनरी भारत के कुल रिफाइनिंग कैपेसिटी का बड़ा हिस्सा हैंडल करती है।

कंपनी रूसी क्रूड के अलावा मिडिल ईस्ट से भी इम्पोर्ट करती है; होर्मुज बंद होने से सप्लाई चेन बाधित।

हाई फ्रेट कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ेंगे।

ग्लोबल रिसेशन फियर से पेट्रोकेमिकल डिमांड प्रभावित हो सकती है।

रिलायंस का डायवर्सिफाइड बिजनेस (टेलीकॉम, रिटेल) भी मार्केट सेंटिमेंट से प्रभावित।

संभावित आगे के प्रभाव

युद्ध अगर लंबा चला तो क्रूड $100 प्रति बैरल तक जा सकता है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, इन्फ्लेशन बढ़ेगा और GDP ग्रोथ पर असर पड़ेगा। रिलायंस जैसे रिफाइनर्स के लिए मार्जिन प्रेशर रहेगा, लेकिन अगर कंपनी अल्टरनेटिव सोर्स (जैसे अमेरिकी क्रूड) से सप्लाई मैनेज करती है तो रिकवरी संभव।

मार्केट में वोलेटिलिटी बनी रहेगी। निवेशकों को शॉर्ट टर्म में सतर्क रहना चाहिए, जबकि लॉन्ग टर्म में रिलायंस का मजबूत बिजनेस मॉडल रिकवरी की उम्मीद देता है।

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Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट वर्तमान बाजार स्थितियों और भू-राजनीतिक घटनाओं पर आधारित है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

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