एनएमडीसी ने रचा इतिहास: 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन करने वाली भारत की पहली खनन कंपनी बनी

“एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया है, जो भारत में किसी भी खनन कंपनी द्वारा एक वित्त वर्ष में हासिल किया गया सबसे बड़ा उत्पादन है। यह उपलब्धि 1958 में स्थापित कंपनी के लिए पांच दशकों की मेहनत का नतीजा है, जहां 1978 में मात्र 10 मिलियन टन से उत्पादन अब पांच गुना बढ़ चुका है। हाल के वर्षों में तेज वृद्धि के साथ कंपनी ‘NMDC 2.0’ रणनीति के तहत राष्ट्रीय इस्पात लक्ष्यों को मजबूती से सपोर्ट कर रही है।”

एनएमडीसी ने रचा कीर्तिमान: 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन

राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) ने भारतीय खनन क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के अंत से ठीक पहले 50 मिलियन टन (50 MT) लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य पार कर लिया है। यह उपलब्धि भारत में किसी भी खनन कंपनी द्वारा एक ही वित्त वर्ष में हासिल की गई सबसे बड़ी मात्रा है। एनएमडीसी भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक होने के साथ-साथ अब जिम्मेदार खनन (Responsible Miner) के रूप में भी अपनी मजबूत स्थिति को और मजबूत कर चुकी है।

यह मील का पत्थर कंपनी की लंबी यात्रा का प्रतीक है। 1958 में स्थापित एनएमडीसी ने 1978 में लगभग 10 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन किया था। उसके बाद से उत्पादन में पांच गुना वृद्धि हुई है, जो लगभग पांच दशकों की निरंतर प्रगति दर्शाती है। लेकिन सबसे तेज वृद्धि हाल के वर्षों में देखी गई है। 2015 में कंपनी का उत्पादन लगभग 30 मिलियन टन था, जो अब 50 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यानी पिछले एक दशक में उत्पादन में लगभग दो-तिहाई की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें से एक-पांचवां हिस्सा मात्र पिछले चार वर्षों में जुड़ा है। यह कंपनी के इतिहास की सबसे तेज विस्तार अवधि है।

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एनएमडीसी की यह सफलता ‘NMDC 2.0’ रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। इस रणनीति के तहत बेहतर निष्पादन, जिम्मेदार खनन प्रथाओं को अपनाना और राष्ट्रीय औद्योगिक प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाना प्रमुख रहा है। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी ने इस उपलब्धि पर कहा कि 50 मिलियन टन का आंकड़ा न केवल ऑपरेशनल मजबूती दिखाता है बल्कि घरेलू इस्पात पारिस्थितिकी तंत्र में एनएमडीसी की विश्वसनीय भूमिका को भी रेखांकित करता है।

एनएमडीसी मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में अपनी पूरी तरह मशीनीकृत खदानों से उत्पादन करती है। बैलाडिला (छत्तीसगढ़) और डोनिमलाई (कर्नाटक) जैसी प्रमुख खदानें उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति करती हैं, जो देश के प्रमुख इस्पात उत्पादकों के संचालन के लिए आधारभूत हैं। कंपनी का उच्च-ग्रेड लौह अयस्क घरेलू इस्पात उद्योग की रीढ़ बन चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर लौह अयस्क की कुल आपूर्ति में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

इस मील के पत्थर से पहले वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया था। अप्रैल-फरवरी 2025-26 में उत्पादन 47.79 मिलियन टन पहुंचा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 18 प्रतिशत अधिक था। फरवरी 2026 में अकेले 5.35 मिलियन टन उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष फरवरी से 16 प्रतिशत अधिक था। बिक्री में भी समानांतर वृद्धि देखी गई, जहां अप्रैल-फरवरी में 44.34 मिलियन टन बिक्री दर्ज की गई, जो 10 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्शाती है।

यह उपलब्धि भारत के इस्पात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का इस्पात उत्पादन लक्ष्य तेजी से बढ़ रहा है। एनएमडीसी का उच्च उत्पादन घरेलू कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करता है और आयात निर्भरता को कम करने में मदद करता है। कंपनी का लंबी अवधि का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन पहुंचाना है, और यह 50 मिलियन टन का पड़ाव उस दिशा में मजबूत कदम है।

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एनएमडीसी की यह उपलब्धि न केवल कंपनी के लिए बल्कि पूरे भारतीय खनन और इस्पात क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है। यह दर्शाता है कि जिम्मेदार खनन, तकनीकी उन्नयन और रणनीतिक फोकस से कैसे तेज विकास संभव है।

Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों और कंपनी घोषणाओं पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं है।

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