“2026 में भारत का सेकंड-हैंड कार बाजार रिकॉर्ड तेजी से बढ़ रहा है, जहां औसत बिक्री मूल्य 5.47 लाख रुपये तक पहुंच गया है। लेकिन बिना सही जांच के पुरानी कार खरीदना बड़ा जोखिम हो सकता है। यहां बताई जा रही 5 मुख्य चीजों की जांच से आप न सिर्फ पैसे बचा सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक बिना परेशानी वाली गाड़ी भी पा सकते हैं।”
पुरानी कार खरीदने से पहले जरूर चेक करें ये 5 चीजें
भारत में 2026 का सेकंड-हैंड कार बाजार तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार का आकार 41.74 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है और यह 14.72% की CAGR से आगे बढ़ रहा है। नए कारों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और SUVs की बढ़ती मांग के कारण लोग पुरानी कारों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन इसी बीच धोखाधड़ी और छिपी खामियों का खतरा भी बढ़ गया है। यहां 5 सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं जिनकी जांच बिना किसी समझौते के करनी चाहिए:
वाहन के दस्तावेज और कानूनी स्थिति की पूरी जांच सबसे पहले RC (Registration Certificate) देखें। चेसिस नंबर और इंजन नंबर गाड़ी पर लगे नंबरों से पूरी तरह मैच करने चाहिए। अगर मेल नहीं खाते तो गाड़ी चोरी की या फर्जी हो सकती है। NOC (No Objection Certificate) जरूर लें, खासकर अगर कार दूसरे राज्य से है। ऑनलाइन Parivahan पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करके चालान, हाइपोथेकेशन (लोन) या कोई आपराधिक इतिहास देख लें। कई बार बकाया चालान या लोन की वजह से नया मालिक फंस जाता है। इंश्योरेंस पॉलिसी ट्रांसफर की स्थिति भी चेक करें – अगर पॉलिसी एक्सपायर होने वाली है तो नई लेने का खर्चा जोड़ें। PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट वैलिड होना चाहिए।
सर्विस हिस्ट्री और मेंटेनेंस रिकॉर्ड असली सर्विस बुक या डिजिटल रिकॉर्ड मांगें। अधिकृत सर्विस सेंटर से नियमित सर्विसिंग हुई हो तो गाड़ी की सेहत अच्छी मानी जाती है। 2026 में ज्यादातर ब्रांड्स डिजिटल सर्विस हिस्ट्री दे रहे हैं, जिसे आप कंपनी ऐप या वेबसाइट से वेरिफाई कर सकते हैं। पिछले 2-3 साल के इंजन ऑयल चेंज, ब्रेक पैड, टायर रोटेशन और मेजर सर्विस जैसे टाइमिंग बेल्ट या क्लच की डिटेल्स देखें। अगर कोई बड़ा एक्सीडेंट हुआ हो तो इंश्योरेंस क्लेम हिस्ट्री भी चेक करें – इससे पता चलता है कि स्ट्रक्चरल डैमेज ठीक हुआ या नहीं।
फिजिकल इंस्पेक्शन और बॉडी-इंजन की कंडीशन कार को दिन की रोशनी में खड़े करके चारों तरफ से देखें। पेंट में कलर मिसमैच, वेवी सरफेस या ज्यादा स्प्रे पेंट के निशान एक्सीडेंट का संकेत देते हैं। दरवाजे, बोनट और बूट ठीक से बंद हो रहे हैं या नहीं चेक करें – गैप ज्यादा होने पर फ्रेम बेंट हो सकता है। टायरों की ग्रूव डेप्थ और वेयर पैटर्न देखें; असमान वेयर से सस्पेंशन या एलाइनमेंट की समस्या पता चलती है। इंजन स्टार्ट करके सुनें – कोई अजीब आवाज, स्मोक या वाइब्रेशन नहीं होना चाहिए। इंजन ऑयल लीक, कूलेंट लेवल और बैटरी कंडीशन भी जांचें। AC, पावर विंडो, सभी लाइट्स और इलेक्ट्रिकल्स टेस्ट करें।
टेस्ट ड्राइव और परफॉर्मेंस चेक कम से कम 10-15 किलोमीटर की टेस्ट ड्राइव जरूर लें। शहर की सड़क, हाईवे और ब्रेकिंग टेस्ट करें। क्लच (अगर मैनुअल है) स्मूद होना चाहिए, गियर शिफ्टिंग क्रिस्प हो। ब्रेक लगाने पर कार सीधी रुकनी चाहिए – पुलिंग या वाइब्रेशन नहीं होना चाहिए। एक्सीलरेशन और पिकअप चेक करें। हाई स्पीड पर स्टेबिलिटी देखें। अगर ऑटोमैटिक है तो शिफ्टिंग में कोई जर्क या डिले नहीं होना चाहिए। 2026 में EVs और हाइब्रिड सेकंड-हैंड में बढ़ रहे हैं, तो बैटरी हेल्थ और चार्जिंग पोर्ट भी जरूर जांचें।
माइलेज, ओनरशिप हिस्ट्री और मार्केट वैल्यू ओडोमीटर रीडिंग देखें – औसतन सालाना 10,000-15,000 किमी से ज्यादा होने पर ज्यादा वियर एंड टियर होता है। एक ही ओनर वाली कार बेहतर होती है, क्योंकि मल्टी-ओनर कारों में मेंटेनेंस कम होता है। मार्केट वैल्यू चेक करें – Cars24, Spinny या OLX जैसे प्लेटफॉर्म्स पर समान मॉडल, वर्ष और कंडीशन की कीमत देखें। 2026 में SUVs और कॉम्पैक्ट क्रॉसओवर की डिमांड ज्यादा है, इसलिए ऐसे मॉडल्स बेहतर रीसेल वैल्यू देते हैं। अगर कीमत मार्केट से बहुत कम है तो कोई छिपी खामी हो सकती है।
कुछ अतिरिक्त टिप्स जो घाटा रोकेंगे
हमेशा ट्रस्टेड मैकेनिक या थर्ड-पार्टी इंस्पेक्शन सर्विस (जैसे GoMechanic या Spinny की) से गाड़ी चेक करवाएं।
अगर बजट 5-10 लाख है तो Maruti, Hyundai या Tata के पॉपुलर मॉडल चुनें – पार्ट्स आसानी से मिलते हैं।
फाइनेंस ले रहे हैं तो प्री-अप्रूव्ड लोन लेकर नेगोशिएशन में फायदा लें।
रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर और RTO प्रोसेस का खर्चा (लगभग 5-10% वैल्यू) पहले से जोड़ें।
इन 5 चीजों की सही जांच से आप न सिर्फ पैसे बचा सकते हैं, बल्कि सालों तक टेंशन-फ्री ड्राइविंग का मजा ले सकते हैं।