**_*“रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर आज 2.5% तक चढ़कर निफ्टी के टॉप गेनर बने। अमेरिकी ट्रेजरी की 30 दिनों की अस्थायी छूट से रूसी क्रूड ऑयल की खरीद संभव हुई, जिससे जामनगर रिफाइनरी के लिए सप्लाई स्थिर रहने की उम्मीद बढ़ी। मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट स्थिरता के लिए यह कदम उठाया गया, जबकि रिलायंस घरेलू बाजार के लिए रूसी ग्रेड प्रोसेस करेगा।”*_
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों में शुक्रवार को जबरदस्त तेजी देखी गई। स्टॉक 2.5% उछलकर ₹1,423.8 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे यह निफ्टी 50 का टॉप गेनर बन गया। इंट्राडे में यह ₹1,424.30 तक छू गया। पिछले सत्र में बंद भाव ₹1,389.40 रहा था।
यह उछाल अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की घोषणा के बाद आया। यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की ऊर्जा नीति से अमेरिका में तेल-गैस उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक एनर्जी मार्केट को स्थिर रखने के लिए भारतीय रिफाइनरों को 30 दिनों की टेम्पररी वेवर दी गई है। यह छूट समुद्र में फंसे रूसी क्रूड ऑयल की खरीद के लिए है। वेवर 4 अप्रैल तक मान्य है।
रिलायंस ने इस छूट का फायदा उठाते हुए रूसी क्रूड की तलाश शुरू कर दी। कंपनी अपनी जामनगर रिफाइनरी (घरेलू बाजार के लिए) में इन ग्रेड को प्रोसेस करेगी। एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड यूनिट्स गैर-रूसी क्रूड पर चलती रहेंगी।
मिडिल ईस्ट तनाव और तेल सप्लाई का संकट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम ने तेल की उपलब्धता को प्रभावित किया। ऐसे में रूसी क्रूड की खरीद से भारत जैसे बड़े आयातक को राहत मिलती है। रिलायंस भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट रिफाइनर है, जिसकी जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी में से एक है।
यह वेवर सैंक्शंस में व्यापक ढील नहीं है। यह केवल अस्थायी और सीमित है, ताकि रूस को ज्यादा आर्थिक लाभ न मिले। फिर भी, यह भारतीय रिफाइनरों के लिए तत्काल सप्लाई चेन स्थिरता प्रदान करता है।
शेयर बाजार पर असर और निवेशक प्रतिक्रिया
रिलायंस का शेयर पिछले दो सत्रों में मजबूत रहा। निफ्टी में 0.35% की गिरावट के बावजूद RIL 1.8-2.5% ऊपर ट्रेड कर रहा था। निवेशकों को उम्मीद है कि यह छूट रिफाइनिंग मार्जिन को सपोर्ट करेगी। रूसी क्रूड आमतौर पर डिस्काउंट पर मिलता है, जो रिफाइनरों के लिए फायदेमंद होता है।
हालांकि, कंपनी ने पहले रूसी आयात कम करने की दिशा में कदम उठाए थे। लेकिन यह अस्थायी राहत से घरेलू प्रोसेसिंग के लिए फायदा मिल सकता है।
रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमता और रणनीति
रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली है। कंपनी विभिन्न स्रोतों से क्रूड आयात करती है। रूसी क्रूड की उपलब्धता से कॉस्ट कंट्रोल में मदद मिलती है।
यह कदम ग्लोबल एनर्जी बैलेंस बनाए रखने में भारत की भूमिका को रेखांकित करता है। अमेरिका-भारत संबंधों के संदर्भ में भी यह महत्वपूर्ण है।